छात्रों के रिजल्ट की देरी पर भड़के छात्र नेता, पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक को किया कैद

लोहाघाट महाविद्यालय में लंबे समय से छात्रों की विभिन्न समस्याओं का समाधान न होने से नाराज छात्र नेताओं ने सोमवार को एबीवीपी के प्रदेश सहमंत्री विवेक पुजारी के नेतृत्व में महाविद्यालय पहुंचे और पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक सीडी सूठा को बंधक बना लिया. घटना से महाविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया.

छात्र नेताओं ने कॉलेज प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

कॉलेज प्रशासन ने छात्र नेताओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन आक्रोशित छात्र नेता समस्याओं के समाधान के लिखित आश्वासन पर अड़े रहे. एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री विवेक पुजारी और छात्र संघ अध्यक्ष ऋतिक ढेक ने कहा कि कॉलेज व विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण 2020 से 25 तक परीक्षा देने वाले कई छात्रों का रिजल्ट घोषित नहीं हो सका है. जिससे पंद्रह सौ दो से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. साथ ही कई छात्र नौकरी पाने से वंचित रह गए हैं.

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पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार

छात्र नेताओं ने कहा कि कई बार कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की मार्कशीट उपलब्ध कराने की मांग की गई, लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया. छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक के कार्यकाल में कॉलेज में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ, सरकारी पैसे का आपस में बंदरबांट हुआ, यहां तक ​​कि कॉलेज का लेजर रजिस्टर भी फाड़ दिया गया, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. आक्रोशितों ने कहा कि सूचना के अधिकार का भी कॉलेज प्रशासन सही जवाब नहीं देता. यहां तक ​​कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को लाइब्रेरियन बना दिया गया है.

लिखित आश्वासन पर माने आक्रोशित छात्र नेता

आक्रोशितों ने कहा कि कॉलेज प्रशासन विद्यालय में कार्यक्रम आयोजित करने को तो तैयार है लेकिन छात्रों की समस्याओं का समाधान करने को तैयार नहीं है. जब छात्र नेता पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक को रिहा करने को तैयार नहीं हुए तो विद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता गुप्ता ने एक माह के अंदर छात्रों की समस्या का समाधान करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद छात्र नेताओं ने पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक को रिहा किया.

मांगें पूरी नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन

इस मामले में पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक सीडी सूठा ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया. छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय व कॉलेज प्रशासन की होगी.

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