आश्विन मास में हर साल शारदीय नवरात्रि मनाई जाती है। नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। तीन अक्टूबर से घट स्थापना होने के साथ ही माता के पहले स्वरूप शेलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। जिसके बाद दूसरे दिन देवी ब्रम्हचारिणी (Maa Brahmacharini) जी की पूजा की जाती है। ऐसे में पहले दिन चलिए जानते है कि विधि विधान से माता ब्रम्हचारिणी की पूजा (Navratri 2024 Day 2 Puja) कैसे की जाती है। साथ ही आरती, कथा और मुहूर्त भी जान लेते है।
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Navratri 2024 Day 2 के दिन पूजा का अभिजीत मुहूर्त 11:52 am से 12:35 pm तक रहेगा। ऐसे में इस समय आप माता के दूसरे स्वरूप की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। आज लेकिन राहुकाल सुबह 10:30 बजे से दोपहर 11:51 तक रहेगा। इस समय कोई भी शुभ कार्य करने से बचे।
- ब्रम्ह मुहूर्त-प्रात काल 04:04 05:05 तक
- अमृत काल-सुबह 06:08 से 07;43 तक
- अभिजीत-सुबह 11:52 से दोपहर 12:35 तक
- विजय मुहूर्त-दोपहर 02:22 से दोपहर 03:23 तक
- गोधुली मुहूर्त-शाम 06:20 से शाम 07:23 तक
- संध्या पूजन-शाम 06:26 से 07:05 तक
- निशीथ काल मुहूर्त-रात्रि 11:41 से रात 12:20 तक
मां ब्रम्हचारिणी की पूजा विधि-मंत्र (Maa Brahmacharini Mantra)
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
मां ब्रम्हचारिणी की आरती ( Maa Brahmacharini Aarti)
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।