नई दिल्ली: भारत में ऑनलाइन फूड डिलीवरी की दिग्गज कंपनियां स्विगी और जोमैटो को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने अपने प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध बड़े रेस्टोरेंट चेन को फायदा पहुंचाने के लिए प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है। यह खुलासा एक दो साल लंबी जांच के बाद हुआ है, जो इन कंपनियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है।
सीसीआई ने जांच में पाया कि दोनों कंपनियों ने अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर विशेष अनुबंधों के माध्यम से बाजार में प्रतिस्पर्धा को रोकने के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए। जोमैटो ने कुछ रेस्टोरेंट्स के साथ ‘विशिष्टता अनुबंध’ किए, जिनके तहत कम कमीशन पर उन्हें विशेष सेवाएं दी गईं, वहीं स्विगी ने अपने साझेदार रेस्टोरेंट्स को यह आश्वासन दिया कि अगर वे सिर्फ स्विगी पर मौजूद रहते हैं, तो उनका कारोबार तेजी से बढ़ेगा। इस तरह के अनुबंधों से छोटे रेस्टोरेंट्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स को भारी नुकसान हुआ है।
सीसीआई की जांच में यह भी सामने आया कि जोमैटो और स्विगी ने रेस्टोरेंट्स को अन्य प्लेटफॉर्म्स पर कम कीमतों की पेशकश से रोका और उनसे समान मूल्य बनाए रखने के लिए दबाव डाला। जोमैटो ने उन रेस्टोरेंट्स पर दंडात्मक कार्रवाई भी की, जिन्होंने इन प्रतिबंधों का पालन नहीं किया।
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स्विगी और जोमैटो पर यह आरोप भी है कि उन्होंने अपने साझेदार रेस्टोरेंट्स को धमकी दी कि अगर वे मूल्य समानता बनाए नहीं रखते हैं, तो उनकी रैंकिंग प्लेटफॉर्म पर नीचे गिरा दी जाएगी, जिससे उनके कारोबार में नुकसान हुआ।
सीसीआई द्वारा इस जांच के निष्कर्षों पर विचार किए जा रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि इस पर अंतिम निर्णय लेने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं। हालांकि, स्विगी और जोमैटो के पास इन निष्कर्षों को चुनौती देने का अधिकार है।
इस जांच का असर दोनों कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा है, खासकर जोमैटो के शेयरों में शुक्रवार को 2.37% की गिरावट आई, जो 249.10 रुपये पर बंद हुआ।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद रेस्टोरेंट्स के अन्य संघों ने भी सीसीआई में शिकायत की थी, जिससे यह जांच शुरू हुई थी। माना जा रहा है कि यदि सीसीआई दोनों कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करता है तो यह भारतीय फूड डिलीवरी उद्योग में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।